हरियाली से कमाई : पौधशाला (नर्सरी) व्यवसाय से लाखों की आमदनी
पौधशाला (नर्सरी) व्यवसाय से प्रति एकड़ ₹10 लाख से अधिक कमाई कैसे करें ? लागत, आय, सरकारी सब्सिडी और लाइसेंस की पूरी जानकारी।
पिछले कुछ वर्षों में पौधशाला यानी नर्सरी व्यवसाय एक लाभकारी और संभावनाओं से भरा उद्यम बनकर उभरा है। शहरों, कस्बों और गाँवों हर जगह इस व्यवसाय की माँग तेजी से बढ़ रही है। बढ़ते पर्यावरण संरक्षण, हरियाली अभियान और जलवायु संतुलन की जरूरत ने पौधों की उपयोगिता को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अब तो हर वर्ष पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर बड़ी संख्या में पौधारोपण किया जा रहा है। राज्य सरकारें भी जनपदए ब्लॉक और पंचायत स्तर पर हजारों से लेकर लाखों पौधों के रोपण को अनिवार्य रूप से बढ़ावा दे रही हैं। लेकिन सीमित सरकारी पौधशालाओं के कारण माँग के अनुरूप पौधों की आपूर्ति संभव नहीं हो पाती।
ऐसे में निजी नर्सरी या पौधशाला स्थापित कर पौधों की नियमित आपूर्ति करके अच्छी और स्थायी आमदनी अर्जित की जा सकती है। यह व्यवसाय खास बात यह है कि इसे कम पढ़े लिखे से लेकर उच्च शिक्षित तक कोई भी व्यक्ति थोड़ी समझ और सही योजना के साथ आसानी से शुरू कर सकता है। यदि पौधशाला की स्थापना करते समय कुछ आवश्यक बिंदुओं पर ध्यान दिया जाए, तो यह उद्यम न केवल रोजगार देता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नये उद्यमी पौधशाला स्थापित करते समय किन बातों का ध्यान रखे। इस पर विस्तार से चर्चा करेगें।
शुरूआती निवेश :
इस व्यवसाय को प्रारम्भ करने के लिए कोई निश्चित पूजी का निर्धारण नही किया गया है। धन की आवश्यकता उद्यम के आकार व पहले से उपलब्ध संसाधनों के अनुसार धन की जरूरत होती है। इस व्यवसाय को कम पूजी से भी अच्छी तरह शुरू किया जा सकता है। पूजी के आभाव में किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक से जानकारी हासिल कर और उचित औचारिकताएं पूरी कर जरूरत के मुताबिक आसानी से ऋण प्राप्त किया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त जनपद स्तर पर व ब्लाक स्तर पर चल रही सरकारी योजनाओं के तहद ऋण भी प्राप्त कर सकते हैं। इन योजनाओं के तहद ऋण लेने में कुछ सरकारी अनुदान भी उद्यमी को दिया जाता हैं।

स्थान का चुनाव : एक महत्वपूर्ण पहलू
जानकारों/विशेषज्ञों के अनुसार एक अच्छी व्यवसायिक पौध नर्सरी को शुरू करने के लिए एक एकड़ भूमि पर्याप्त होती है। लेकिन आज के इस तकनीकी युग में कोई चीज बाधा नही होती। यदि उद्यमी के पास इससे कम भूमि है, तब भी संसाधनों के समुचित उपयोग और कुशल प्रबंधन के व्दारा इस व्यवसाय को भली भाति शुरू कर सकता है। व्यवसायिक स्तर पर पौध नर्सरी की शुरूआत करने के लिए उसी स्थान का चुनाव करना चाहिए जो मुख्य मार्ग से जुडा, कस्बे व शहर के पास हो एवं अवागमन के साधन अच्छे हो। भूमि यदि किराए या लीज पर ली गई हो तो अवधि 5 या 10 वर्ष से कम नही होनी चाहिए। क्यांेकि इस व्यवसाय से अच्छी आमदनी दो वर्ष बाद ही शुरू हो पाती है।
नर्सरी की श्रेणी : पौध नर्सरी व्यवसाय शुरू करने पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि हम किस उद्देश्य से नर्सरी स्थापित कर रहे हैं। व्यवसायिक स्तर पर मुख्यतः चार प्रकार की नर्सरी स्थापित की जा सकती है।
एकल उद्देशीय नर्सरी : इस प्रकार की नर्सरी में सिर्फ एक ही प्रकार के पौधे तैयार किए जाते हैं। जैसे-फलों की नर्सरी, फूलों की नर्सरी, वृक्षों की नर्सरी, शोभाकार पौधों की नर्सरी आदि।
बहुउद्ेशीय नर्सरी : इस प्रकार की नर्सरी में विविध प्रकार के फल-फुल वाले पौधे, शोभाकारी पौधे, लताएं, झाड़िया, घासें, सब्जी के पौधे व उनके बीज आदि तैयार किए जाते हैं। व्यवसायिक दृष्टिकोण से इस प्रकार की नर्सरी स्थापित करना अधिक लाभदायक होता है।
विशिष्ट नर्सरी : इस प्रकार की नर्सरी में सिर्फ एक विशेष वर्ग के पौधे, फल और फूल तैयार किए जाते हैं। इस तरह की नर्सरी का उद्देश्य कुछ खास किस्म के पौधों का संग्रह करना होता है।
पूरक नर्सरी : इस प्रकार की नर्सरी का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नही होता है। यह किसी संस्था या केन्द्र से सम्बद्ध होती है।
भूमि का चयन : पौधशाला/ नर्सरी के लिए दोमट या बलुई दोमट मृदा सर्वोत्तम होती है। यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि भूमि में पानी का ठहराव न होता हो। इसके लिए कोशिश होनी चाहिए कि उपयुक्त जल निकास वाली समतल भूमि का चुनाव करें। बलुई मिट्टी वाली भूमि का चुनाव करने से बचना चाहिए।
प्रवर्धन क्यारिया : पौधशाला/ नर्सरी में पौधे बीज, कलम, गूटी, ग्राफटिंग, इनारचिंग, बडिंग आदि लैंगिंग और अलैंगिंग विधियों के व्दारा तैयार किए जाते हैं। पौधों को तैयार करने के लिए हवादार, खुला, उॅचा और सूर्य का प्रकाष पहुॅचने वाले स्थान का चुनाव करना चाहिए।

मातृ पौधों का चयन और स्थान : अधिक आय की कुंजी
पौधशाला व्यवसाय से अधिक और स्थायी आय प्राप्त करने के लिए नर्सरी में मातृ पौधों की स्थापना अनिवार्य मानी जाती है। मातृ पौधों की मदद से बहुत कम लागत में बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार किए जा सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
मातृ पौधे हमेशा पूरी तरह रोगमुक्त, स्वस्थ और उन्नत किस्मों के होने चाहिए। प्रत्येक मातृ पौधे पर उसकी किस्म के अनुसार स्पष्ट नाम,पत्र लेबल अवश्य लगाना चाहिएए , ताकि उनसे तैयार होने वाले पौधों की पहचान और शुद्धता बनी रहे। इससे ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ता है।
एक व्यावसायिक नर्सरी में कुल क्षेत्रफल का लगभग 40 प्रतिशत भाग मातृ पौधों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए। सही स्थानए सही किस्म और उचित देखभाल के साथ लगाए गए मातृ पौधे नर्सरी को लंबे समय तक निरंतर आय देने वाला मजबूत आधार बन जाते हैं।
पौध बदलने की क्यारिया : बीज या वनस्पतिक प्रवर्धन तरीके से तैयार पौधों को एक स्थान पर अधिक दिनों तक नही रखना चाहिए। क्योकि इन पौधों की प्राथमिक जड़े भूमि में अधिक गहराई तक चली जाती हैं, जिसके कारण रेशेदार पतली जड़ का पूर्ण विकास नही हो पाता है। इन पाधों को नर्सरी से निकालते समय जड़े कट जाने के कारण पौधों के मरने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसलिए पौधों को छोटी अवस्था में ही खुदाई करके निर्धारित क्यारियों में स्थानतरित कर देना चाहिए। पौध बदलने की क्यारियों का तेज धूप, लू, पाला, वर्षा आदि से बचाने के लिए छायादार स्थान का प्रबंध करना चाहिए।
गमला रखने का स्थान :
पौधशाला/ नर्सरी में गमला रखने का स्थान को दो भागों में बाटकर रखना चाहिए। एक भाग आंशिक छायादार तथा दूसरा पूर्णेतः खुला हवादार होना चाहिए। खुले स्थान में बीज से तैयार पौधों तथा छायादार स्थान में वनस्पतिक विधि से तैयार पौधों के गमलों को रखना चाहिए। विभिन्न तरह के खाली गमलों को रखने के लिए अलग से स्थान होना चाहिए।
क्यारी बदलने हेतु स्थान :
नर्सरी में काफी संख्या में वार्षिक फूल, शोभाकार पौधे, फल वृक्ष, सब्जी के पौधों को बीज व्दारा क्यारी में तैयार किया जाता है। एक ही क्यारी में लगातार कई वर्षों तक पौध तैयार करने से पौधों में रोग व कीड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में स्वस्थ और निरोगी पौधे तैयार करना कठिन हो जाता है। इसलिए नर्सरी में कुछ स्थान खाली छोड़ रखना चाहिए, ताकि समय-समय पर क्यारियों को बदला जा सके।

आवागमन का स्थान :
पौधशाला/ नर्सरी का खाका इस तरह तैयार करना चाहिए ताकि उसका प्रत्येक भाग रास्तों से जुड़ा रहे। नर्सरी में मुख्य सड़क काफी चैड़ी बनानी चाहिए जिससे नर्सरी में ट्रक, ट्रैक्टर, ट्राली, रिक्सा, तांगा, बैलगाड़ी व अन्य वाहनों का आवागमन आसानी से हो सके।
सिंचाई का साधन : पौधशाला/ नर्सरी में सिंचाई की व्यवस्था उच्च कोटि की रखनी चाहिए। इसके लिए नर्सरी में सबसे उॅचे स्थान में ट्यूबेल लगाना चाहिए ताकि नर्सरी में सभी जगह पानी आसानी से पहुच सके। सिंचाई की मुख्य नालियों को सीमेंट की बनाना चाहिए। आजकल फौव्वारा सिंचाई की विधि काफी चलन में है। इसके लिए सरकार से कुछ सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। जल समस्या वाले क्षेत्रों के लिए यह विधि वरदान साबित होती है।
पौध पैकिंग स्थान : पैकिंग स्थान का स्थान हमेशा कार्यालय व भण्डार के समीप बनाना चाहिए। इससे पैकिंग सामग्री जैसे-टोकरी, पालीथीन, नामपत्र, रस्सी, पुआल आदि आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
आवश्यक यंत्र : पौधशाला/ नर्सरी में जुताई, निकाई-गुडाई करने के लिए हैरो, कल्टीवेटर, फावड़ा, कुदाल फोर्क आदि यंत्रों की आवयश्कता होती है। पौधे के प्रर्वधन हेतु चाकू, सिकेटियर, आरी, दवाओं के छिड़काव हेतु स्प्रेयर मशीन, बाल्टी, हजारा आदि की जरूरत होती है।
पौध प्रवर्धन में प्रयुक्त संरचनाएं : फूलों-फलों को उगाने, बीजों का स्तरण, कलम में मूल विभेदन, नए अंकुरित पौधों या जड़ युक्त कलमों तथा गूटी व्दारा प्रवर्धित पौधों के कठोरीकरण हेतु विभिन्न प्रकार की संरचनाओं का उपयोग समय-समय पर किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से ग्रीन हाउस, ग्लास हाउस, पाली हाउस आदि संरचनाओं का उपयोग किया जाता है।
पौध प्रवर्धन के लिए उपयुक्त माध्यम : इसके लिए विभिन्न प्रकार के माध्यम एवं मिश्रण उपयोग में लाए जाते हैं। माध्यम सघन और कठोर होना चाहिए ताकि कलम और बीज अंकुरण के समय एक अवस्था में बने रहे। माध्यम में केवल आवश्यकतनुसार पानी धारण की क्षमता होनी चाहिए। प्रयुक्त घासों के बीज, सूत्रकृमि, कवक आदि के संक्रमण से मुक्त होने चाहिए। उपयोग में लाए जाने वाले माध्यम का पी.एच. मान उदासीन होना चाहिए।
मिट्टी : मिट्टी का प्रयोग बहुतायत रूप से प्रवर्धन के लिए किया जाता है। इसके लिए जीवांश युक्त बलुई दोमट भूमि जिसका पी.एच. मान 5.5 से 6.5 के मध्य हो, साथ ही उचित जल निकास की व्यवस्था होनी चाहिए।
बालू : पौधों के प्रवर्धन के लिए क्वार्ट्ज बालू का उपयोग किया जाता है। नदियों से प्राप्त बालू में किसी प्रकार के कोई पोषक तत्व न होने के कारण प्रवर्धित पौधों में जड़े निकलते ही या बीजों के स्तरण के बाद माध्यम को बदल देना चाहिए। बालू को उपयोग में लाने से पूर्व फार्मलीन से उपचारित कर लेना चाहिए।
वर्मीकुलाइट : यह एक अभ्रकी खनिज है। इसमें जल धारण क्षमता काफी अधिक होती है। बाजार में कई प्रकार के वर्मीकुलाइट उपलब्ध हैं। किन्तु बीजों के अंकुरण के लिए केवल औद्यागिक ग्रेड के वर्मीकुलाइट का प्रयोग करना चाहिए।
पीट : पीट जलीय, कच्छ तथा दलदल में उगने वाले पौधों के अपघटन से प्राप्त होती है। यह अम्लीय प्रकृति की होती है। इस्तेमाल में लाने से पूर्व इसको छोटे-छोटे टुकड़ों में करके पानी से नम कर लेना चाहिए।
स्फैगनम मास : इसमें भी पानी धारण की क्षमता अच्छी होती है। इसका प्रयोग गूटी व्दारा पौध तैयार करने में काफी होता है। इसके प्रयोग से प्रवर्धित पौधों में जड़ों का विकास तेजी से होता है।
लकड़ी का बुरादा : इसका प्रयोग बीज व्दारा पौध तैयार करने में होता है। यह वजन में हल्का तथा इसमें औसतन जल धारण क्षमता होती है।

कैसे प्राप्त करें लाईसेन्स : निजी पौधषाला/नर्सरी स्थापना हेतु सरकार से लाइसेन्स लेने की आवश्यकता होती है। लाइसेन्स प्राप्त करने के लिए आवेदक को निम्न शर्ते पूरी करनी होती हैं।
- पौधशाला का क्षेत्रफल 0.2 हैक्टेयर से कम नही होना चाहिए।
- पौधशाला की भूमि उगाये जा रहे फल-वृक्षों व पौधों के अनुकूल होनी चाहिए।
- पौधशाला में कायिक प्रर्वधन हेतु मातृ वृक्ष और मूल वृंत उपलब्ध होना चाहिए।
- पौधशाला सरकार व्दारा प्रतिबंधित नही होना चाहिए।
- मातृ वृक्ष और मूल वृंत समस्त कीट व्याधियों से मुक्त होने चाहिए।
उपरोक्त शर्ते पूर्ण होने पर राज्य के निदेशक, उद्यान और फल आयोग के समक्ष लाईसेन्स जारी करने हेतु प्रार्थना पत्र देना चाहिए। इसके बाद सबंधित अधिकारी उचित फीस लेकर लाईसेन्स जारी करते हैं।
एकड़ में पौधशाला (नर्सरी) व्यवसाय के लिए व्यय (खर्च) और आय (कमाई) का एक व्यावहारिक अनुमान दिया जा रहा है। यह मॉडल सामान्य फल, छायादार, औषधीय व सजावटी पौधों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
एक एकड़ पौधशाला व्यवसाय : अनुमानित व्यय
स्थायी (एक बार होने वाला) खर्च
- भूमि समतलीकरण व मेड़बंदी – ₹20,000
- शेडनेट / पॉलीशेड (आंशिक) – ₹60,000
- सिंचाई व्यवस्था (बोरिंग/ड्रिप/पाइप) – ₹40,000
- बीज बेड, ट्रे, टंकी, औजार – ₹25,000
- मातृ पौधों की स्थापना – ₹30,000
कुल स्थायी खर्च : ₹1,75,000
वार्षिक संचालन खर्च
- पॉलीबैग, ट्रे, गमले – ₹50,000
- बीज, कलम, ग्राफ्ट सामग्री – ₹35,000
- गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैव खाद – ₹30,000
- मजदूरी (1–2 मजदूर) – ₹70,000
- पानी, बिजली, रख-रखाव – ₹20,000
कुल वार्षिक खर्च : ₹2,05,000
कुल अनुमानित व्यय (पहला वर्ष)
₹3,80,000 (लगभग)
1 एकड़ पौधशाला से अनुमानित आय
| पौधों का प्रकार | संख्या | औसत मूल्य (₹) | कुल आय (₹) |
| फलदार पौधे | 25,000 | 20 | 5,00,000 |
| छायादार/वन पौधे | 30,000 | 10 | 3,00,000 |
| सजावटी पौधे | 15,000 | 30 | 4,50,000 |
| औषधीय पौधे | 10,000 | 15 | 1,50,000 |
कुल वार्षिक आय : ₹14,00,000
(शुद्ध लाभ Net Profit)
- कुल आय : ₹14,00,000
- कुल खर्च : ₹3,80,000
शुद्ध लाभ : ₹10,20,000 प्रति वर्ष (दूसरे वर्ष से और अधिक)
पहले वर्ष में आय आंशिक होती है, लेकिन दूसरे वर्ष से नर्सरी पूर्ण क्षमता पर चलती है और लाभ तेजी से बढ़ता है।
केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाएँ
- राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM – National Horticulture Mission)
फल, फूल, सब्जी एवं पौध नर्सरी स्थापना पर अनुदान - मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH)
आधुनिक नर्सरी, हाईटेक नर्सरी, शेडनेट/पॉलीहाउस नर्सरी पर 40–60% तक अनुदान - राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
कृषि आधारित उद्यम, निजी नर्सरी और स्टार्टअप को सहायता - राष्ट्रीय वनरोपण एवं पर्यावरण विकास बोर्ड (NAEB)
वृक्षारोपण हेतु पौधशाला विकास और पौध उत्पादन पर सहायता - प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME)
नर्सरी से जुड़े कृषि-उद्यमों को ऋण व सब्सिडी (राज्यों में लागू)
राज्य सरकार की योजनाएँ
- राज्य बागवानी विभाग की नर्सरी विकास योजना
निजी/समूह नर्सरी, फल-फूल पौधशाला पर अनुदान - वन विभाग की सामाजिक वनीकरण योजना
पौध उत्पादन, पॉलीबैग, शेड, सिंचाई संरचना पर सहायता - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM / SHG आधारित)
स्वयं सहायता समूहों द्वारा नर्सरी संचालन पर सहायता - प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
नर्सरी व्यवसाय शुरू करने पर बैंक ऋण + 15–35% सब्सिडी

