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छोटे पेड़, बड़ा आकर्षण : बोनसाई कला का जादू

बोनसाई उत्पादन: शौक से कारोबार और  कमाई

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Magic of Bonsai Technique : Small is Beautiful

क्या कभी आपने देखा है कि छोटे-छोटे गमलों में तैयार विशालकाय वट वृक्ष, पीपल, पाकड, बरगद, या फिर फलदार, अमरूद, नारंगी, नाशपाती, नींबू, कटहल जैसे पौधे अपनी अलग ही मनमोहक दुनिया रचते हैं? दरअसल, यह सब संभव हो पाता है बोनसाई कला से। होटलों, दफ्तरों और सीमित जगहों में बोनसाई वृक्ष सजावट, हरियाली और पर्यावरण प्रेम का अद्भुत नजारा पेश करते हैं। शहरी लोगो के जीवन में प्राकृति का रंग भरने में ‘बोनसाई’ अहम रोल अदा करते हैं। पहले लोग बोनसाई को सिर्फ शौकिया तौर पर करते थे, लेकिन अब यह एक व्यवसाय बन चुका है। आज के दौर में एक सुंदर और परिपक्वव बोनसाई की मुह मागी कीमत देने को तैयार हैं। बाजार में एक आकर्षक बोनसाई की कीमत हजारों से लेकर लाखों तक हो सकती है। आज के इस लेख में लोग अपने शौक को कारोंबार में कैसे बदले और कैसे इसे कमाई का जरिया बनाएं ? इस पर हर पहलू की विस्तार से जानकारी दी जायगी।   

कमाई का जरिया:

बोनसाई उत्पादन एक व्यावसायिक महत्व की कला है। कभी यह धनी और कुलीन वर्ग  की कोठियों की शोभा होते थे। अब बोनसाई आम लोगों के बीच खूब लोकप्रिय हो रहे हैं। पांच सितारा होटलों, कॉर्पोरेट दफ्तरों से लेकर सामान्य घरों तक, हर जगह इनकी मांग बढ़ रही है। लोग अच्छी तैयार बोनसाई को बाजार में मुह मागी कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं। इस वजह से बाजार में बोनसाई की माग वर्ष भर रहती है।

बोनसाई की एक खासियत यह भी है कि जितनी पुरानी बोनसाई, उतनी ही मुह मागी कीमत।  बोनसाई की उम्र 30 से लेकर 150 वर्ष तक हो सकती है। देश में बोनसाई एक लघु व्यवसाय के रूप में तेजी से उभरा है। यह बहुत ही कम पूजी से शुरू होने के कारण कोई भी व्यक्ति, जिसको पेड़-पौधों और प्रकृति में रूचि हो, आसानी से शुरू कर सकता है। बोनसाई से व्यक्ति को प्रकृति का आनंद और आर्थिक लाभ दोनों प्राप्त होते हैं।

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Different Shape And Size of Handcrafted Bonsai Pots

बोनसाई का उद्गम: बोनसाई कला की शुरुआत चीन में हुई, लेकिन इसे लोकप्रियता जापान में मिली। बौद्ध भिक्षु इस कला को साधना का माध्यम मानते थे, जहाँ वे बौने वृक्षों के माध्यम से जीवन के संघर्ष और संतुलन का प्रतीक देखते थे। ‘बोनसाई’ शब्द जापानी भाषा के दो शब्दों “बोन” (थाली या ट्रे) और “साई” (पौधा लगाना) से मिलकर बना है। इस कला में किसी वृक्ष को उथले पात्र में प्राकृतिक ढंग से बौने रूप में ढाला जाता है, जबकि “बोन्काई” में वृक्षों के साथ पर्वतीय दृश्य का संयोजन किया जाता है।

बोनसाई बनाने की कला

बोनसाई निर्माण एक जीवंत कला है, जिसमें शौक के साथ रचनात्मकता, धैर्य और पौधों के प्रति समर्पण आवश्यक है। मुख्यतः निम्नवत बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

शैली का चयन: बोनसाई की सुंदरता उसकी शैली पर निर्भर करती है। सामान्यतः इसकी ऊँचाई 40 सेंटीमीटर तक रखी जाती है, जबकि बेबी बोनसाई मात्र 7 सेंटीमीटर तक के होते हैं। इनको 13 प्रमुख शैलियों में तैयार किया जाता है। बोनसाई तैयार करने में कटाई-छाटाई कर विभिन्न शैलियों/स्टाइल में ढाला जाता है।

इन शैलियों में मुख्य रूप से एक तने वाली, दो तने वाली, अनेक तने वाली, लहरदार एवं तिरछा बोनसाई है। इनके अतिरिक्त कैस्केड बोनसाई, ब्रूम बोनसाई, राफ्ट बोनसाई, विन्ड स्वेप्ट बोनसाई, राक बोनसाई एवं ओपन रूट बोनसाई आदि शैलिया भी खूब प्रचलित हैं।

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A Beautiful Bonsai Tree : Small Tree Big Attention

वृक्षों का चयन :

बोनसाई के लिए ऐसे वृक्ष चुनने चाहिए, जिनकी पत्तियाँ सुंदर हों, फूल-फल आकर्षक लगें और जो हर जलवायु में लंबे समय तक टिक सकें। इसके लिए बीजू पौधे ज्यादा उपयुक्त होते हैं। बीजू पौधे की बोनसाई कलमी पौधों की अपेक्षा देखने में अधिक खूबसूरत, वास्तविक और प्राकृतिक लगते हैं। बोनसाई के लिए बरगद, पीपल, पाकड़, अमलताश, नीम, गुलमोहर, अर्जुन, अशोक, सीसम, कचनार, बांस आदि सर्वोत्तम माने जाते हैं।

पात्रों का चुनाव :

बोनसाई के लिए सदैव उथले, मिट्टी के बने पात्रों/गमलों का उपयोग करना चाहिए। इनकी गहराई 2 से 15 सेंटीमीटर और चैड़ाई 40 सेंटीमीटर तक होती है। पात्रों में जल निकास के लिए छिद्र अवश्य होने चाहिए। उथले पात्रों के चुनाव का उद्देश्य होता है कि जड़ों के पास कम से कम मिट्टी रहे ताकि पोषक तत्व कम मात्रा में उपलब्ध हो सके। धातु या सीमेन्ट पात्रों का उपयोग न करें, क्योंकि ये पात्र धूप में शीघ्र गर्म हो जाते हैं जिससे पौधों की जड़ों का नुकसान होता है।

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Natural Beauty in Small Pot

मिट्टी का मिश्रण :

बोनसाई पौधों को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए कम पोषक तत्वों वाली मिट्टी का प्रयोग करें। मिश्रण तैयार करने में एक भाग पुरानी गोबर खाद, एक भाग पत्ती खाद, एक भाग मोटी बजरी, थोड़ी मिट्टी, नीम की खली और हड्डी का चूरा मिलाना उपयोगी होता है। मिट्टी का मिश्रण हल्का और भुरभुरा होना चाहिए ।

पात्रों में पौधरोपण  :

फरवरी-मार्च या बरसात का मौसम बोनसाई लगाने के लिए सबसे उपयुक्त होता है। पौधों की जड़ों की हल्की कटाई कर गमले में लगाएँ और शुरुआती दिनों में छायादार स्थान पर रखें। धीरे-धीरे इन्हें खुली धूप में लाएँ। पात्र के छेदों का कंकड़ या जाली लगा देना चाहिए। नियमित सिंचाई आवश्यक है। गर्मी में दिन में दो बार हल्की फुहारे से पानी दें।

आकार और छंटाई :

बोनसाई का आकर्षक रूप कई वर्षों में विकसित होता है। प्रारम्भ में 5 से 7 सेंटी मीटर के बोनसाई वृक्षों की छटाई करते है। इस समय शीर्ष कलिका की कटाई करते हैं ताकि पौधे में खूब शाखाएं निकल आये। शाखाओं को दिशा देने के लिए पतले एल्यूमिनियम या ताँबे के तार का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें शाखाओं के मजबूत होते ही हटा देना चाहिए। नियमित छँटाई और देखभाल से वृक्ष को मनचाहा रूप मिलता है।

पात्रों को बदलनाः

बोनसाई के पात्र बदलने की जरूरत उसके बढ़ने की गति और उम्र पर निर्भर करती है। तेजी से बढ़ने वाले पौधों को हर साल गमला बदलना चाहिए, जबकि धीमी गति वाले पौधों को गर्म-आर्द्र जलवायु में 3–4 साल और शुष्क जलवायु में 4–6 साल में। गमला बदलते वक्त पौधे को निकालकर जड़ों की मिट्टी हटाई जाती है, कम उम्र में जड़ों की अधिक छंटाई और अधिक उम्र में हल्की कटाई की जाती है। नए गमले में मिट्टी का मिश्रण आधा भरकर पौधे को लगाते हैं और अतिरिक्त पानी निकालने के लिए छेद पर कंकड़ या पत्थर रखते हैं।

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Bonsai Create A Natural Beauty in Indore Area

सिंचाई :

बोनसाई वृक्षों में सिंचाई का विशेष महत्व होता है। इनके पात्रों में अधिक मिट्टी नही होती, इसलिए हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है। सिंचाई का कार्य नियमित रूप से प्रतिदिन करना चाहिए। लेकिन पात्र की मिट्टी गीली हो तो सिंचाई नही करनी चाहिए। बड़े पात्रों में लगाए गए बोनसाई की आपेक्षा छोटे पात्रों में लगाए गए बोनसाई के वृक्षों को अधिक सिंचाई की आवष्यकता होती है। गर्मी के मौसम में खासकर मई-जून के माह में दिन में दो बार सिंचाई करनी चाहिए। सिंचाई का काम हजारा या फौव्वारा से करना चाहिए।

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Different Varieties of Bonsai Trees

बोनसाई उत्पादन की कुछ खास बातें : अच्छी बोनसाई के लिए कुछ खास बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

  • बोनसाई के उपर का शीर्ष भाग इस तरह हो कि पूरे वृक्ष का अन्तिम छोर लगे।
    • वृक्ष की सभी शाखाएं स्वस्थ और कलात्मक रूप में फैली हो।
    • बोनसाई वृक्ष प्रजाति के अनुसार उसका व्यक्तित्व झलकता हो।
    • जड़ के पास का तना देखने में अधिक उम्र का प्रतीत होता हो।
    • जिस शैली में बोनसाई वृक्ष तैयार किया गया हो उसकी झलक स्पष्ट दिखती हो।

व्यवसाय की समझ और प्रशिक्षण :

बोनसाई व्यवसाय शुरु करने से पहले इस व्यवसाय से जुडी बुनियादी जानकारी अवश्य लें, क्योकि बोनसाई केवल पौधा लगाना नहीं, बल्कि कला, धैर्य और तकनीक का संगम है।

कैसे सीखें :

  • स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या हॉर्टिकल्चर विभाग में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। अनुभवी बोनसाई उत्पादकों से या फिर नर्सरी से जुड़ें लोगों से प्रशिक्षण ले सकते हैं।
  • व्यक्तिगत उद्यमी ऑनलाइन कोर्स चलाने वालों से प्रैक्टिकल जानकारी प्राप्त कर          सकते हैं।
  • नये उद्यमी के लिए 2 से 3 महीने का अनुभव पर्याप्त होता है।dsc00883

प्रारंभिक निवेश और आवश्यक संसाधन :

स्थान  शुरूआत के लिए 1000 – 1500  वर्गफुट जगह पर्याप्त है। छायादार और हवादार स्थान चुनें, जहाँ 3–4 घंटे धूप आती हो।

प्रारंभिक निवेश (लगभग ₹20,000–₹50,000)

मदअनुमानित लागत (₹ में)
पौधे / नर्सरी सैपलिंग5,000 – 10,000
मिट्टी, खाद, बजरी, नीम खली3,000 – 5,000
उथले पात्र / गमले5,000 – 10,000
औज़ार (कैंची, वायर, ट्रे, स्प्रेयर आदि)3,000 – 5,000
शेड, सिंचाई, रखरखाव5,000 – 10,000

अन्य उपकरण : कैंची, तांबे/एल्यूमिनियम तार, ट्रिमिंग ब्लेड, हजारा (स्प्रे), छोटी बाल्टी, छेद वाले गमले आदि।

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Commercial Production of Bonsai Trees

बिक्री और मार्केटिंग रणनीति :

कहाँ बेचें :

  • स्थानीय नर्सरी और गार्डन स्टोर
  • ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म: Amazon, Flipkart, Indiamart
  • अपनी वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज: Instagram, Facebook
  • कॉर्पोरेट गिफ्टिंग, होटल, कैफे, इंटीरियर डिजाइनर्स से संपर्क करें।

     बिक्री मूल्य (अनुमानित )

बोनसाई प्रकारआयु        बाजार मूल्य (₹ में)
छोटा (7–10 से.मी.)6–12 माह        ₹500 – ₹1,000
मध्यम (20–30 से.मी.)2–3 वर्ष         ₹2,000 – ₹5,000
परिपक्व (50 से.मी. से अधिक)5 वर्ष+        ₹10,000 – ₹50,000 या अधिक

बोनसाई उत्पादन से लाभ की अनुमानित संभावना :

एक प्रशिक्षित व्यक्ति अगर 100 बोनसाई पौधे बनाता है और प्रति बोनसाई औसतन ₹1,500 में बेचता है , तो कुल आय ₹1,50,000 और शुद्ध लाभ लगभग ₹80,000–₹1,00,000 तक संभव है। अच्छे कलाकारों की बोनसाई तो ₹20,000 से ₹1 लाख तक में बिकती हैं। यह आय और व्यय का बहुत ही छोटे स्तर में शुरू करने का एक अनुमानिे लाभ दिखाया गया है। जैसे-जैसे व्यवसाय का आकार बडा होगा, आय भी बढती जायगी।

सरकारी अनुदान व सब्सिडी

  • बोनसाई उत्पादन के लिए सरकार कई प्रकार के अनुदान और सब्सिडी उपलब्ध कराती है, जिनके तहत उद्यमियों को आर्थिक सहायता दी जाती है।
  • भारत में Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) के तहत नर्सरीज के लिए 25% से 33% तक सब्सिडी मिलती है, जो बोनसाई उत्पादन व्यवसाय के लिए उपयोगी है।
  • कुछ राज्यों में बोनसाई पौधे उत्पादन के लिए 50% तक की सब्सिडी भी उपलब्ध होती है, जहां किसान केवल आधी लागत का भुगतान करते हैं।
  • राष्ट्रीय परियोजना और राज्य सरकारों के कृषि व उद्यानिकी विभाग इस अनुदान की प्रक्रिया में मार्गदर्शन करते हैं।

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