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खाद्य प्रसंस्करण : ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का मजबूत आधार

खाद्य प्रसंस्करण से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर, कम लागत में बिजनेस शुरू करने की विधि, लागत- लाभ और सफल उदाहरण   से युवा जानें फूड प्रोसेसिंग यूनिट से कैसे करें कमाई ।

Key Words : खाद्य प्रसंस्करण, Food Processing Business Hindi,  ग्रामीण स्वरोजगार, Food Processing Unit Project,  कम लागत बिजनेस आइडिया,  कृषि आधारित उद्योग, Village Business Idea

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में फलों एवं सब्जियों का विशाल उत्पादन जहां एक ओर रोजगार के अनेकों अवसर खोलता है] वहीं दूसरी ओर प्रसंस्करण की मूलभूत सुविधाओं के अभाव में फल और सब्जियों की भारी मात्रा में बर्बादी भी होती है। एक आकड़े के मुताबिक लगभग 20 -30 फीसदी प्रति वर्ष  संरक्षण और प्रसंस्करण के अभाव में नष्ट हो जाती है] जिससे किसानों और उद्यमियों के साथ देश को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

          ऐसे में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र न केवल इस नुकसान को कम करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है बल्कि ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम भी हो सकता है। । देश में कुल उत्पादन का मात्र 2 फीसदी प्रसंस्करण हो पाता हैं जो विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। देशी बाजार के साथ साथ विदेशी बाजार में भी प्रसंस्कृत खाद्य प्रदार्थों के निर्यात की प्रचुर संभावनाएं हैं। विश्व खाद्य बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग एक फीसदी है । आज खानपान की बदलती जीवन शैली उपभोक्ता रुझानों] बढ़ती बाजार मांग और निर्यात की संभावनाओं के बीच यह क्षेत्र आज छोटे स्तर से लेकर बड़े उद्योग तक के लिए सुनहरे अवसर प्रदान करने की क्षमता रखता है। ग्रामीण स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण को कुटीर उद्योग धंधो के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

जैम, जैली एवं मार्मलेड : जैम, जैली एवं मार्मलेड बनाने के लिए फलों का अम्लीय रस, पेक्टीन और चीनी आदि कच्चे माल की आवष्यकता पड़ती है। अम्लीय रस तथा पेक्टीन फलों से ही प्राप्त होता है। अम्लीय रस, पेक्टीन और चीनी के सही अनुपात के मिश्रण को गर्म करने पर ठीक तरह से मिल जाते हैं तो इसे ठंडा करने पर अर्धपारदर्षक गाढ़े प्रदार्थ में परिवर्तित हो जाते हैं। इसी आधार पर जैम, जैली एवं मार्मलेड बनाया जाता है। इनको बनाने के लिए उन्हीं फलों का चुनाव करते हैं जिनमें अम्लीय रस और पेक्टीन की मात्रा अधिक पाई जाती है।

जैली बनाने की विधि : 10 किग्रा0 अमरूद की जैली बनाने के लिए 2 किग्रा0 कच्चे तथा 8 किग्रा0 अधपके अमरूद के फलों का चुनाव करना चाहिए। अच्छे गुणवत्ता वाले फलों को चुनने के बाद अच्छी तरह पानी से धो लेना चाहिए। इसके बाद फलों को छोटे-छोटे टुकड़ो में काटकर लेते हैं तथा इतनी ही मात्रा पानी की मिलाकर धीमी आॅच पर उबाला जाता है। उबालते समय इन्हें चममच से चलाते रहना चाहिए जिससे फलों का रस अच्छी तरह निकल जाता है। इसके बाद इसको किसी मलमल के कपडे से छान लेते हैं। रस को कपडे में डालने के बाद अपने आप ही छनने देना चाहिए। दबाकर छानने से जैली की गुणवत्ता पर बुरा असर पडता है। अब छने हुए गूदे में पहले की अपेक्षा आधा पानी मिलाकर पुनः 15 मिनट तक उबालना चाहिए। इसके बाद पुनः रस को छानना चाहिए तथा पहले से तैयार रस में इस रस को मिला देना चाहिए। अब इस रस को धीमी आच में गर्म होने के लिए रख देते हैं। इसके बाद इसमें रस के बराबर मात्रा में चीनी को लेकर इसमें धीरे-धीरे मिलाते हैं जिससे चीनी रस में अच्छी तरह मिल जाए। फिर इस रस को पुनः महीन कपड़े से अच्छी तरह छान लेते हैं ताकि रस की सारी गंदगी निकल जाए। इस तैयार रस में 5 ग्राम साईटिक एसिड प्रति लीटर रस की दर से मिलाते हैं। फिर इस रस को धीमी आच पर तब तक उबालते हैं जब तक की जैली बन कर तैयार न हो जाए। इस समय जैली का तापमान 105 डिग्री सेंटीगे्रड हो जाता है। इसे जैली तैयार होने का बिन्दु मानते हैं। यह जानने के लिए थर्मामीटर के व्दारा तापमान को माप लेते हैं। अन्य तरीके से भी इसको पता कर सकते हैं। इसके लिए पानी भरी थाली में थोड़ा सा गर्म रस डालनें पर फेले नही और गोली का रूप लेले तो समझना चाहिए जैली बनकर तैयार हो गई है। यदि पानी में डालने पर रस की बूॅंद फैल जाती है तो जैली को और पकना चाहिए। इसके बाद तैयार जैली को पाष्चुरीकृत बोतलों में भर कर रख देते हैं। अच्छी जैली पारदर्षक, न अधिक गीली, न अधिक कड़ी, अच्छे रंग वाली व चाकू से काटने में चाकू पर चिपकती नही है।  

विभिन्न प्रकार के फलों का स्क्वैश बनाने की विधि :

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सामग्री                                                             फलों का नाम

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                                                 नीबू                   संतरा                  आम

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 फलों का रस                              10 लीटर               10 लीटर               10 लीटर

पानी                                        7.5 लीटर              7.5 लीटर              10 लीटर

चीनी                                        20 किग्रा0                15 किग्रा0               10 किग्रा0

साईटिक एसिड                           100 ग्राम               100 ग्राम              100 ग्राम 

पोटैषियम मेटाबाई सल्फेट             1 ग्राम                   1 ग्राम                   1 ग्राम

खाने वाला रंग                            बसंती रंग              नारंगी रंग               नारंगी रंग       

(आवष्यकतानुसार)                                          

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विधि : स्क्वैश बनाने के लिए पूर्ण पके हुए फलों का चुनाव करना चाहिए। फलों को अच्छी तरह पानी से धोने के बाद हाथ से दबाकर या फिर संतरा व नीबू का रस मषीन के व्दारा निकाल लिया जाता है। रस को बारीक छननी से अच्छी तरह छान लेते हैं। स्क्वैष बनाते समय सिर्फ स्टेनलेस या फिर अल्यूमिनियम के भगोना व चाकू का ही इस्तेमाल करना चाहिए। स्क्वैष बनाने के लिए चीनी की दी हुई मात्रा की एक तार की चाशनी बना लेनी चाहिए। चाषनी बनाते समय इसका तापमान 70 डिग्री सेंटीग्रेट तक पहुंचना चाहिए। चाषनी में उबाल आने पर साईटिक एसिड को मिलाना चाहिए। लगभग 10 मिनट में एक तार की चाशनी तैयार हो जाती है। इस तैयार गर्म चाशनी में रस को मिला दिया जाता है जिससे रस भी गर्म हो जाता है और जीवाणु निष्क्रिय हो जाते हैं। इसी समय थोड़े से रस में पोटैषियम मेटाबाई सल्फाइड तथा रंग घोल कर तैयार चाषनी एवं रस के मिश्रण में मिला दिया जाता है। अब स्क्वैश बनकर तैयार गया। इस तैयार स्क्वैस को पाष्चुरीकृत बोतलों में भर कर रख देते हैं। भरते समय ध्यान रखते हैं कि बोतलें 2 सेंमी. तक खाली रहे। बोतलों को उबली हुई कार्क से अच्छी तरह सील कर देते हैं ताकि बाहरी वायु थोड़ी भी अन्दर न प्रवेष कर सके।

लाईम कार्डियल : लाईम कार्डियल नीबू के पके फलों के साफ किए हुए रस से तैयार किया जाता है। रस को साफ करने के लिए 1 ग्राम पोटैषियम मेटाबाई सल्फाइड की मात्रा को प्रति लीटर रस की दर से मिलाकर दो माह के लिए सुरक्षित रख दिया जाता है। दो माह बाद रस को बोतलों से निकालने के बाद स्क्वैश की तरह 1 किग्रा0 चीनी और 1 लीटर पानी मिलाकर चाषनी तैयार कर उसमें 1 लीटर साफ रस मिलाकर लाईम कार्डियल तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद इसको पाष्चुरीकृत बोतलों में भर कर रख देते हैं।

टमाटर से तैयार उत्पाद : टमाटर से निम्नलिखि प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं जिसमे प्रमुख हैं- टमाटर कैचप, टमाटर सास, टमाटर सूप, टमाटर जैली, टमाटर मार्मलेट, टमाटर चटनी, टमाटर मुरब्बा, टमाटर पूरी, प्रिजर्व, फल पाक, कैन्ड टमाटर इत्यादि।

टमाटर सास एवं कैचप बनाने की विधि : टमाटर से तैयार होने वाला सबसे प्रमुख प्रसंस्कृत उत्पाद है टमाटर सास या फिर टमाटर कैचप जो अधिकतर लोगों व्दारा उपयोग में लाया जाता है। टमाटर के इन दोनों उत्पादों में प्रयोग होने वाली सामग्री एवं बनाने की विधि में बहुत ही कम अन्तर होता है। अन्तर सिर्फ गाढ़ेपन का होता है। टमाटर कैचप, टमाटर सास की अपेक्षा अधिक गाढ़ा होता है। टमाटर कैचप की ब्रिक्स प्रतिषत 28 से 30 तथा टमाटर सास की ब्रिक्स प्रतिषत 25होती है।

                 टमाटर सास बनाने के लिए अच्छे पके लाल टमाटर का चुनाव करना चाहिए। चुने हुए फलों को साफ बहते हुए पानी में धोने के बाद चाकू से छोटे-छोटे टुकड़ो में काट लेना चाहिए। कटे हुए फलों को 20 से 30 मिनट तक गर्म किया जाता है ताकि वे टुकडे़ अच्छी तरह मुलायम हो जाएं। इसी समय प्याज, लहसुन, अदरक आदि को कूचकर मिलाना चाहिए जिससे उसका अर्क अच्छी तरह रस में मिल जाए।

               पके हुए टमाटरों का रस निकालनें के लिए पहले टमाटर के टुकडो़ को बीज एवं छिलका रहित कर दिया जाता है। इसके लिए एल्यूमिनियम की छलनी को किसी पात्र पर रख कर उबले हुए टुकडों को छलनी पर रख कर मसलते हैं जिससे गूदा व रस पात्र में एकत्र हो जाता है और छिलका तथा बीज छलनी में रह जाता है। इसके बाद गूदे व रस को स्टील के पात्र में पकाने के लिए रख देते है। चीनी की 2/3 मात्रा षुरू में डाल देते है जिससे रस का रंग काला हो जाता है, शेष चीनी की मात्रा को सास तैयार होने के कुछ समय पहले डाला जाता है जो भूरा रंग देता है। ये दोनों रंग मिलकर सास को लाल रंग देते है। मसालों को बारीक पीस कर कपड़े में बाधकर पकते हुए रस में डुबोकर लटका देते है। जब सास तैयार होने को होता है तो मसालों की पोटली को अलग कर दिया जाता है। जब पके हुए सामग्री का ब्रिक्स लगभग 25 प्रतिषत हो जाए या फिर तस्तरी में डालने पर पानी न छोडे़ तो समझना चाहिए साॅस बनकर तैयार हो गया। इसके बाद सास को आग से नीचे उतारकर एसिटिक एसिड, नमक, टमाटर का रंग, लाल मिर्च व सोडियम बेन्जोएट की निष्चित मात्रा मिलाकर सास को चममच से अच्छी प्रकार चला देना चाहिए। सास को थेाडा ठंडा होने पर अच्छी साफ की हुई बोतलों में भर कर अच्छी तरह सील कर देते हैं। इन भरी हुई बोतलों को ठंडे, सूखे एवं प्रकाष रहित स्थान पर रखना चाहिए।

सामग्री : 10 किग्रा0 टमाटर से सास तैयार करने हेतु आवष्यक सामग्री। पके टमाटर 10किग्रा0, चीनी 5 किग्रा0, नमक 160 ग्राम, लाल मिर्च 50 ग्राम, लहसुन 100 ग्राम, प्याज 400 ग्राम, अदरक 200 ग्राम, गर्म मसाला 50 ग्राम, एसिटिक एसिड 20 मिली0या 4 छोटी चममच, टमाटर का रंग 1 ग्राम, सोडियम बेंजोएट 15 से 20 ग्राम इत्यादि। 

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चिली सास बनाने की विधि : चिली सास, टमाटर सास और टमाटर कैचप की तरह ही हेाता है। अन्तर सिर्फ इतना होता है कि यह छिले हुए टमाटर से बनाया जाता है जिसमें से बीज नही निकाले जाते हैं। यह टमाटर कैचप से भी अधिक तीखा होता हैं। इसका उपयोग अन्य खाद्य प्रदार्थों को सुवासित करने के काम आता है। इसका उपयोग चटनी के रूप में भी किया जा सकता है। टमाटर को छीलकर और कोर हटाकर बिना बीज निकाले गूदा तैयार कर लिया जाता है। इसके लिए टमाटर को भाप या उबलते पानी में छिलका फअने तक रखा जाता है। उसके बाद ठंडे पानी में डालकर छिलका हटा लिया जाता है। अब इस गूदे में सभी आवष्यक सामग्री एवं मसालें मिलाकर टमाटर सास की तरह ही पकाया जाता है। लेकिन टमाटर सास की तरह इसकी सफाई नही की जाती है क्योंकि इसमें टमाटर के टुकडे़ और बीज होते हैं। यह बीज ही इसे चिली सास का रूप देते हैं। सामान्यतः 10 किग्रा0 टमाटर से 8-9 किग्रा0 चिली सास बन कर तैयार होता है। तैयार चिली सास को अच्छी साफ की हुई बोतलों में तुरन्त गर्म ही भर दिया जाता है और अच्छी तरह सील करने के बाद ठंडा किया जाता है। उसके बाद इन भरी हुई बोतलों को ठंडे, सूखे एवं प्रकाष रहित स्थान पर रखना चाहिए।

सामग्री : छिले हुए टमाटर 10 किग्रा0, चीनी 750 किग्रा0, नमक 125 ग्राम, लहसुन 5 ग्राम, प्याज 350 ग्राम, लौंग 8 ग्राम, दालचीनी 2 ग्राम, राई 8 ग्राम, काली मिर्च, जीरा, इलायची 5 ग्राम, एसिटिक एसिड 600 मिली0 इत्यादि।

टमाटर चटनी बनाने की विधि : टमाटर को छीलकर गूदा अलग करने के बाद सिरके के अतिरिक्त सभी आवष्यक सामग्री एवं मसालें मिलाकर कड़ाई में गाढ़ा होने तक पकाया जाता है। इसके बाद इसमें सिरका मिलाकर 5 मिनट तक और पकाते हैं। इसके बाद गर्म चटनी को  अच्छी साफ की हुई बोतलों में भर कर रख देते हैं।

सामग्री : 10 किग्रा0 टमाटर, चीनी 13.5 किग्रा0, नमक 650 ग्राम, लाल मिर्च 10 ग्राम, प्याज 7 किग्रा0, अदरक 45 ग्राम, एसिटिक एसिड 150 मिली0 इत्यादि।

टमाटर रस बनाने की विधि : टमाटर रस पूर्ण पके हुए टमाटर के फलों से तैयार किया जाता है। रूप से निकाल दिया जाता है। टमाटर रस बनाने के लिए लाल टमाटर का चुनाव करते है, अधपके, दागी, गले, हरे टमाटरों को छॅाट कर निकाल देना चाहिए अन्यथा रस की गुणवत्ता खराब हो जाती है। टमाटर का रस दो विधियों व्दारा निकाला जाता है- तप्त विधि और षीतला विधि। पहली विधि व्दारा रस निकालने के लिए टमाटर को काटकर अपने ही रस में 3 से 5 मिनट तक उबाला जता है। इससे रस की प्राप्ति अधिक होती है। दूसरी विधि के व्दारा कटे हुए टमाटर को बिना किसी ताप उपचार के पल्पर व्दारा रस निकाला जाता है। टमाटर रस की प्राप्ति लगभग 70-80 प्रतिषत तक होती है। 10 किग्रा0 टमाटर रस में 40-60 ग्राम नमक और चीनी मिलानी चाहिए। इससे रंग व सुगंध अच्छी रहती है। टमाटर रस में नमक और चीनी मिलाने के बाद इसे 85-88 तापक्रम तक गर्म किया जाता है। और इसी ताप पर डिब्बो और बोतलों में भर कर बंद कर देते है। इन्हे उबलते पानी में 15-40 मिनट तक रखा जाता है। डिब्बो को पानी में और बोतलों को हवा में ठंडा किया जाता है।

टमाटर सूप बनाने की विधि : टमाटर सूप भूख बढ़ाने वाला, स्वादिष्ट और पाचनकारी होता है। टमाटर सूप को भी टमाटर रस की तरह ही बनाया जाता है। इसको बनाने में टमाटर रस, मक्खन या क्रीम, अरारोट, मसालें आदि स्वाद के अनुसार विभिन्न अनुपात में मिलाया जाता है। 8.5 किग्रा0 टमाटर रस को बडे बर्तन में रखकर उबाला जाता है। प्रयोग होने वाले मसालों को एक थैली या पोटली में बांधकर रस में लटकाकर छोड देते हे। अलग से 1.5 किग्रा0 टमाटर रस में मक्खन या क्रीम और अरारोट मिलाया जाता है। जब रस पकते-पकते गाढ़ा हो जाता है तब इस मिश्रण को उसमें मिलाकर वांछित गाढ़ेपन तक पकाया जाता है। इसके बाद रस से मसाले की पोटली अलग कर देते है। फिर इसमें चीनी व नमक मिलाकर दो मिनट के लिए पकाया जाता है। गर्म सूप को डिब्बो और बोतलों में भरने के बाद 40-45 मिनट तक ताप संसाधित करते हैं। इसके बाद इन डिब्बो और बोतलों को सूखे, ठंडे स्थान में रख देते है।

सामग्री : टमाटर का रस 10 किग्रा0, चीनी 170 ग्राम, नमक 112 ग्राम,  प्याज 130 ग्राम, लौंग 2 ग्राम, दालचीनी 2 ग्राम, लाल मिर्च 0.3 ग्राम, सफेद मिर्च चूर्ण 3 ग्राम,  सोठ 1.4 ग्राम, काली मिर्च, जीरा, इलायची 2 ग्राम, अरारोट मॅड 42 ग्राम, क्रीम 190 ग्राम या मक्खन 70 ग्राम इत्यादि।

अचार : फलों तथा सब्जियों को कई तरह के  अचार बनाने के प्रयोग में लाते है। सबसे पहले फलों तथा सब्जियों को साफ कर छोटे-छोटे टुकड़ो में काटकर उबाल लेते हैं। इन उबले हुए फलों तथा सब्जियों में नमक तथा उचित मात्रा में मसालें मिलाकर कुछ दिनों के लिए धूप में रख देते हैं जिससे उसमें कुछ खटास पैदा हो जाए। उसके बाद उसमें परिरक्षक सिरका या तेल डालकर उचित पात्र में भरकर रख दिया जाता है। फलों तथा सब्जियों का अचार बनाने के लिए निम्नलिखित अनुपात में सामग्री प्रयोग में लानी चाहिए। प्रति 10 किग्रा0 फल तथा सब्जियों के लिए कलौजी काली व सफेद 100 ग्राम, मेथी 400 ग्राम, नमक 150-200 ग्राम, सरसों का तेल 10 किग्रा0, लाल मिर्च 400 ग्राम, हल्दी 400ग्राम, सौंफ 400ग्राम, राई 200 ग्राम की दर से सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए।

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खाद्य प्रसंस्करण यूनिट (छोटे स्तर)  :  लागत लाभ  विश्लेषण

यूनिट का प्रकार

  • उत्पाद : जैम, जैली, स्क्वैश, टमाटर सॉस, अचार
  • स्तर : लघु (ग्रामीण कुटीर उद्योग)
  • क्षमता : 100–150 किग्रा/दिन कच्चा माल

प्रारंभिक पूंजी  (Fixed Cost)

मद           अनुमानित लागत ()
भवन/शेड (किराया/अस्थायी)20,000
मशीनरी (पल्पर, कटर, गैस चूल्हा, बर्तन)60,000
स्टोरेज टैंक/ड्रम15,000
बोतल/पैकेजिंग उपकरण15,000
अन्य उपकरण (वजन मशीन आदि)10,000
कुल स्थायी लागत1,20,000 ₹

कार्यशील पूंजी (Working Cost – प्रति माह)

मद                          लागत ()
कच्चा माल (फल, सब्जी)40,000
चीनी, मसाले, केमिकल20,000
पैकेजिंग (बोतल, लेबल)15,000
मजदूरी (2–3 व्यक्ति)25,000
बिजली/ईंधन5,000
परिवहन/अन्य खर्च5,000
कुल मासिक लागत1,10,000

उत्पादन एवं बिक्री

  • कच्चा माल : 100 किग्रा/दिन
  • तैयार उत्पाद : 70–80 किग्रा/दिन
  • मासिक उत्पादन : 2000 किग्रा

औसत बिक्री मूल्य : ₹100–150/किग्रा

मासिक कुल बिक्री (औसत 120/kg):
2000 × 120 = 2,40,000 ₹

लाभ (Profit Calculation)

विवरणराशि ()
कुल बिक्री2,40,000
कुल खर्च1,10,000
शुद्ध लाभ (मासिक)1,30,000 ₹

वार्षिक  लाभ : 1,30,000 × 12 = 15,60,000 ₹/वर्ष

निष्कर्ष:  खाद्य प्रसंस्करण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रभावी साधन है। यह न केवल कृषि उत्पादों के नुकसान को कम करता है, बल्कि मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाता है। मात्र 1–1.5 लाख के निवेश से शुरू होकर प्रति माह 1 लाख से अधिक लाभ कमाया जा सकता यदि इसे सही प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जाए, तो यह व्यवसाय ग्रामीण स्वरोजगार का सबसे मजबूत आधार बन सकता है।

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