कृषि और पर्यटन का नया संगम: फार्म-स्टे योजना
ग्रामीण पर्यटन की नई शुरूआत
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उत्तर प्रदेश सरकार होमस्टे नीति-2025 के तहत किसानों की माली हालत सुधारने के लिए “ होम स्टे और फार्म स्टे” योजना की शुरूआत की है। यह योजना परम्परागत होटल/रिसार्ट से हटकर, पर्यटन को खेती-किसानी के परिवेश और अनुभवों से जोडती है। सरकार के इस कदम से न सिर्फ किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण पर्यटन में नई क्रान्ति आएगी है। ग्रामीण परिवेश, पर्यटन और अर्थव्यवस्था का नया केंद्र बनेगा। भारत गावों का देश है। गांव की आत्मा और अर्थव्यवस्था को एक साथ जोडने से किसानों, युवाओं और ग्रामीण महिलाओं को आय के अनेकों अवसर पैदा होंगे। सरकार की इस साहसिक और महत्वाकाक्षी योजना के विभिन्न पहलुओं पर आज इस लेख में विस्तार से चर्चा करेंगे।

योजना की रूपरेखा:
- योजना का नाम होम-स्टे और फार्म-स्टे दिया गया है।
- खेत और उसके आस-पास बने परिसर में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था होगी।
- फार्म स्टे योजना में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए गए हैं।
- संरक्षक/मालिक का आवास पर्यटक आवास से अलग होगा।
- इस योजना के अन्र्तगत कम से कम दो किराए योग्य कमरे और एक रिसेप्सन क्षेत्र का होना अनिवार्य होगा।
- खेती-किसानी के साथ बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मछली पालन, बत्तख पालन, फार्म टूर जैसी गतिविधियों को शामिल किया जायगा, ताकि पर्यटक ग्रामीण जीवन का वास्तविक आनन्द उठा सके।
- इसके अलावा बुनियादी सुविधाएं, स्थानीय संस्कृति, रीति-रिवाज, परम्पराव अतिथ्य सत्कार को प्राथमिकता दी गई है।
- इस योजना को सफल और आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने विभिन्न स्तरों पर आर्थिक और प्रशासनिक सहयोग प्रदान करेगी।
- निवेश राशि के अनुसार सरकार अनुदान के मापदण्ड निर्धारित किए है।
- 10 लाख रू से 10 करोड़ तक निवेश पर 25 प्रतिशत तक अनुदान, जिसकी अधिकतम सीमा २ करोड तक होगी।
- 10 करोड से 50 करोड तक निवेश पर 20 प्रतिशत तक अनुदान प्राप्त होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 7.5 करोड तक रखी गई है।
- 200 करोड तक एवं 500 करोड से अधिक निवेश पर क्रमशः 15 प्रतिशत एवं 10 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जायेगी। इसकी भी अधिकतम सा तय है।
- 5 करोड़ तक के बैंक ऋण पर 5 फीसदी सब्सिडी प्रति वर्ष अधिकतम 25 लाख तक एवं अधिकत 5 वर्ष तक के लिए दी जाएगी।
- स्टाम्प इयूटी, भूमि रूपांतरण शुल्क, विकास शुल्क आदि पर 100 फीसदी छूट का प्राविधान है।
- महिला उद्यमी, एससी/एसटी, ओबीसी वर्ग के लिए 5 फीसदी अतिरिक्त सब्सिडी दी जायगी।
योजना के उद्देश्य : योजना का मुख्य उद्देश्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आवास की कमी को दूर करना, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूकना है। इसके अतिरिक्त-
- ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ाना, जिससे देश-विदेश के पर्यटक असल ग्रामीण जीवन का अनुभव ले सके।
- किसानों, ग्रामीण एवं छोटे उद्यमियों को अतिरिक्त आय के साधन पैदा करना जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बन सके।
- ग्रामीण जीवन, सस्कृति, परम्परा, कृषि पर्यटन, हस्त शिल्प, ग्रामोद्योग एवं आतिथ्य सत्कार को जोडकर ग्रामीण विकास का एक नया माडल खड़ा करना।
- पर्यटन के आदान-प्रदान से गांव शहर के बीच व्यवसायिक गतिविधि स्थापित कर देश में ग्रामीण पर्यटन का सफल उदाहरण पेश करना।
योजना का लक्ष्य:
- वर्ष 2025-30 तक कम से कम 5,000 फार्म-स्ट/होमस्टेे इकाइयाँ विकसित करना है।
- अनुमानित निवेश लगभग रू 2,500 करोड़ तक, साथ ही निजी निवेश आकर्षित करने की पूरी संभावना है।
- ग्रामीण रोजगार सृजन एक फार्म-स्टे/होमस्टेे इकाई से औसतन 6-10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा।
- कृषि-पर्यटन से जुड़ी सहायक आय (लोक-भोजन, हस्तशिल्प बिक्री, गाइड सेवा आदि) से औसतन रू 15,000-25,000 प्रति माह अतिरिक्त आय होने की संभावना आकी गई है।
योजना के प्रारंभिक अनुभव:
योजना के शुरुआती दौर में ही जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। पहले महीने में 743 होमस्टे और 30 फार्म स्टे पंजीकृत होना, इस योजना की लोकप्रियता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। स्थानीय लोग योजना का लाभ उठाने के लिए उत्सुक हैं। कई होमस्टे संचालकों का कहना है कि इससे उनको अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। यही नही, इससे वे अपनी स्थानीय परम्परा और संस्कृति को पर्यटको के साथ साझा करने में गर्व महसूस करते हैं। लखनऊ में अकेले 800 नए होमस्टे खुलने की संभावना है, जबकि प्रयागराज में भी 800 इकाइयों का लक्ष्य रखा गया है। बदायूं, चित्रकूट, अयोध्या, लखनऊ, और मिर्जापुर जिलों में दर्जनों किसान अब अपने खेत को “Mini Resort” के रूप में चला रहे हैं।
1. लखनऊ – “शहरी-ग्रामीण कनेक्ट”
- अमौसी-मोहनलालगंज क्षेत्र में कुछ किसानों ने इस योजना का लाभ लेकर अपने खेतों को फार्म-स्टे में बदला है। क्षेत्र में वीकेंड टूरिस्टों के लिए “रूरल पिकनिक पैकेज” के लिए लोकप्रिय हुआ है।
2. वाराणसी – “सांस्कृतिक फार्म-स्टे मॉडल”
- वाराणसी के किसान भी इस योजना में अपना भविष्य तलाश रहे है। कुछ स्थानीय किसानों ने बाग-बगीचे-आधारित आवास विकसित किए है, जहाँ पर्यटक “कृषि, संस्कृति और परम्परा” एक साथ अनुभव करते हैं।
- गंगा किनारे जैविक खेती, मृदंग-संगीत सत्र, देसी भोजन इसके प्रमुख आकर्षण है।
- वाराणसी के कोरौली गांव में 5 एकड़ के खेत को ‘Farm Stay’ में बदला गया,
जहाँ अब हर महीने सैकड़ों देशी-विदेशी पर्यटक ग्रामीण जीवन का अनुभव करते हैं।
3. चंद्रावल (बुंदेलखंड) – “सूखे क्षेत्र में नवाचार”
- बुंदेलखंड के किसान भी इस योजना का लाभ लेने में पीछे नही है। योजना का लाभ लेकर “सूखे क्षेत्र में नवाचार” की बयार बहा रहे है।
- पर्यटकों के लिए जल संरक्षण, बकरी-पालन और देसी भोजन पर आधारित अनुभव साझा कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रहे हैं। महिला स्वयं-सहायता समूह द्वारा संचालन होने से महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सामाजिक और आर्थिक महत्व:
- यह योजना न सिर्फ आय के नये स्रोत पैदा करेगी, बल्कि ग्रामीण समाज में सामुदायिक एकता, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को भी गति मिलेगी।
- ग्रामीण पर्यटन से किसानों, युवाओं और शिल्पकारों के लिए आय-विविधता बढ़ेगी। साथ ही, यह मॉडल पर्यावरणीय दृष्टि से भी टिकाऊ है क्योंकि इसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और नैसर्गिक जीवनशैली को बढ़ावा दिया गया है।
योजना के प्रकार: सरकार की यह योजना ग्रामीण एवं शहरी दोनो क्षेत्रों के लिए शुरू की गई है जिसका अलग-अलग नाम भी दिया गया है।
फार्म स्टे योजना : यह किसी कार्यरत खेत या कृषि क्षेत्र में या उसके निकट बनाई गई पर्यटक आवास सुविधा है, जो खेत मालिक के निवास से अलग होती है। इसमें कम से कम 2 किराए योग्य कमरे और एक रिसेप्शन क्षेत्र होना आवश्यक है। फार्म स्टे में पर्यटकों को खेती, बागवानी, मछली पालन, डेयरी फार्मिंग, पशुपालन, फार्म टूर जैसी ग्रामीण गतिविधियों में सीधे भाग लेने का अवसर मिलता है।
ग्रामीण होमस्टे योजना : यह नगर निगम सीमा के बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित आवासीय इकाई है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को गांव के जीवन, स्थानीय संस्कृति, भोजन और ग्रामीण गतिविधियों का वास्तविक अनुभव कराना है। यहां बाथरूम, शौचालय, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधा होना आवश्यक है। इसमें अधिकतम 6 कमरे और 12 बिस्तर की अनुमति है।
शहरी होमस्टे योजना : शहरी क्षेत्र में स्थित आवासीय इकाई जहां मालिक अपने परिवार के साथ अनिवार्य रूप से रहता है। इसमें 1 से 6 कमरे (अधिकतम 12 बिस्तर तक) हो सकते हैं। और मालिक अपने कुल कमरों के अधिकतम दो-तिहाई हिस्से को किराए पर दे सकता है। पर्यटकों को नाश्ता (breakfast) प्रदान करना अनिवार्य है।

बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना : यह भी शहरी आवासीय इकाई है, लेकिन इसमें मालिक के रहने की अनिवार्यता नहीं है। इसके बजाय एक केयरटेकर का उपस्थित रहना आवश्यक है। होमस्टे की तरह इसमें भी 1-6 कमरे और अधिकतम 12 बिस्तर हो सकते हैं। यह पर्यटकों को किफायती आवास और भोजन प्रदान करने की योजना है।
पंजीकरण श्रेणियां और शुल्क : योजना के तहत होमस्टे को सिल्वर और गोल्ड दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
सिल्वर श्रेणी – शहरी क्षेत्र के लिए रू 2,000 पंजीकरण शुल्क एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए रू 500 पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।
गोल्ड श्रेणी – शहरी क्षेत्र के लिए रू 3,000 पंजीकरण शुल्क एवं ग्रामीण क्षेत्र के लिए रू 750 पंजीकरण शुल्क रख गया है। गोल्ड श्रेणी की इकाइयों में अधिक सुविधाएं जैसे एसी, टीवी, वाई-फाई आदि की व्यवस्था होती हैं।
पात्रता मापदंड : केवल घर के मालिक ही इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह गैर-व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, इसलिए होटल और गेस्ट हाउस इस योजना के अंतर्गत नहीं आते। संपत्ति पूर्णतः आवासीय होनी चाहिए और धार्मिक या पर्यटन स्थलों के निकट स्थित होना वांछनीय है। होमस्टे और ग्रामीण होमस्टे के लिए मालिक का अपने परिवार के साथ वहां रहना अनिवार्य है। 6 से अधिक कमरों वाली इमारतें इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
सुरक्षा और मानक पहलू : पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए योजना में कड़े मानक निर्धारित किए गए हैं।
- कम से कम 3 ब्ब्ज्ट कैमरे स्थापित करना अनिवार्य है, जिनमें 90 दिनों की वीडियो रिकॉर्डिंग सुविधा हो।
- अग्नि सुरक्षा उपकरण (Fire Department द्वारा अनुमोदित) होना आवश्यक है
- B&B इकाइयों में अनिवार्य केयरटेकर की उपस्थिति आवश्यक है।
- अतिथियों का KYC दस्तावेज संग्रह और स्थायी रजिस्टर में अभिलेख रखना जरूरी होगा।
- नियमित निरीक्षण और अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

पंजीकरण प्रक्रिया:
- पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है और up&tourismportal.in पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
- ऑनलाइन आवेदन, पहचान पत्र, संपत्ति स्वामित्व प्रमाण और स्व-घोषणा शपथ पत्र के साथ जमा करें।
- पुलिस और स्थानीय अधिकारियों से छव्ब् (अनापत्ति प्रमाण पत्र) प्राप्त करें।
- जिला स्तरीय समिति (जिलाधिकारी की अध्यक्षता में) आवेदन की समीक्षा करती है।
- समिति में एसपी, कर अधीक्षक, अग्निशमन अधिकारी और पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।
- इकाई का भौतिक निरीक्षण किया जाता है।
- समिति 90 दिनों में अपनी सिफारिश पर्यटन निदेशालय को भेजती है।
- पंजीकरण प्रमाण पत्र 3 वर्ष के लिए वैध होता है।
- नवीनीकरण के लिए समाप्ति से 3 माह पूर्व आवेदन करना होता है।
योजना की चुनौतियाँ और समाधान:
- आवश्यक अवसंरचना की कमी : ग्रामीण सड़कों, साफ-पानी व बिजली की स्थिति अभी भी सुधार योग्य।
- समाधान : पर्यटन विभाग और ग्राम पंचायत संयुक्त रूप से फार्म-स्टे अवसंरचना कोरिडोरष् विकसित करें।
- प्रशिक्षण और आतिथ्य मानक : अधिकतर ग्रामीण परिवारों को “टूरिज्म सर्विस” का अनुभव नहीं।
- समाधान : कृषि विश्वविद्यालय और पर्यटन संस्थान संयुक्त रूप से “ग्रामीण-आतिथ्य प्रशिक्षण कार्यक्रम” चलाकर योजना से जुडे लोगो को व्यावसायिक पहलू से अवगत कराएं।
- डिजिटल-बुकिंग और प्रचार की कमी: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपस्थिति न के बराबर।
- समाधान : UPFarm&HomeStayPortal या सरकारी-मान्यता प्राप्त ऐप की शुरूआत हो।
- संस्कृति संरक्षण : ग्रामीण इलाकों में आधुनिक पर्यटक सुविधाएँ देने की होड़ में गाँव की असली पहचान खोने का खतरा पैदा हो सकता है।
- समाधान : हर इकाई में स्थानीय स्थापत्य, लोककला, और भोजन का न्यूनतम 30 तक अनिवार्य किया जाए।
योजना का प्रचार :
सरकार ने Bayweaver Nests के साथ एक MoU साइन किया है ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता की कहानियों के जरिए होमस्टेयोजना को बढ़ावा दिया जा सके । राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं मान्यवर काशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान के साथ भी सहयोग स्थापित किया गया है। यह योजना सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) और समुदाय-आधारित पर्यटन (Community Base Tourism) के सिद्धांतों पर आधारित है, जो यह सुनिश्चित करती है कि पर्यटन का लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंचे। इससे गांवों में बुनियादी ढांचे का विकास, रोजगार सृजन और जीवन स्तर में सुधार होगा। स्थानीय युवाओं को कहानीकार के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे गांव के इतिहास, किंवदंतियों और लोककथाओं को पर्यटकों को रोचक तरीके से सुना सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम:
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग, मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान (डज्ञप्ज्ड) में 5-दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। इसमें संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, स्वच्छता मानक, बुनियादी कंप्यूटर उपयोग, डिजिटल मार्केटिंग, स्थानीय व्यंजन तैयारी, इंटीरियर सजावट और ग्राहक सेवा रणनीतियां सिखाई जाती हैं। प्रशिक्षण प्भ्ड लखनऊ के संकाय सदस्यों द्वारा दिया जाता है। प्रतिभागियों को अध्ययन सामग्री, मूल्यांकन, प्रमाण पत्र और किट प्रदान की जाती है।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश सरकार की इस दूरदर्शी पहल से राज्य को देश की ग्रामीण पर्यटन की राजधानी बनाने में एक बड़ा कदम साबित होगा। यह योजना न केवल पर्यटन की बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता देने और स्थानीय संस्कृति को पुष्पित, पंलवित और संरक्षित करने में भी मददगार साबित होगी। जो लोग अपने घर या संपत्ति को होमस्टे/फार्म स्टे के रूप में पंजीकृत करना चाहते हैं, वे up&tourismportal.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

