प्याज का औषधीय महत्व : रसोई की शान और सेहत का साथी
प्याज के फायदे, पोषक तत्व, घरेलू नुस्खे और सेवन की सावधानियां जानिए।
देश की रसोई में शायद ही कोई ऐसा शाकाहारी या मांसाहारी व्यंजन बनता हो, जिसमें प्याज की मौजूदगी न हो। सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक, प्याज हर थाली में किसी न किसी रूप में मौजूद रहता है। कहीं सब्जी और मसाले में, कहीं सलाद, अचार और चटनी में, तो कहीं बाजार में मिलने वाले तरह-तरह के फास्ट फूड्स के साथ, प्याज का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में होता है। स्वाद के साथ-साथ यह पौष्टिक और औषधीय गुणों से भी भरपूर है। यही वजह है कि प्याज को “घर का वैद्य” कहा जाता है।
खेती और उत्पादन में भारत की धाक
प्याज की भारी खपत का सीधा असर इसकी खेती पर दिखता है। पूरे भारतवर्ष में प्याज की खेती बड़े पैमाने पर होती है। क्षेत्रफल के लिहाज से भारत दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि उत्पादन में चीन के बाद दूसरे नंबर पर आता है। विश्व के कुल प्याज उत्पादन का करीब 11 प्रतिशत अकेले भारत में पैदा होता है।
देश के भीतर ज्यादा खपत और विदेशों को निर्यात की वजह से प्याज को नकदी फसल के रूप में उगाया जाता है। व्यावसायिक दृष्टि से उगाई जाने वाली सब्जी फसलों में प्याज का स्थान प्रमुख है। यानी यह केवल रसोई का मसाला नहीं, बल्कि लाखों किसानों की आमदनी का बड़ा जरिया भी है।
वानस्पतिक परिचय
प्याज अमरेलिडेसी कुल का शाकीय पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम एलियम सेपा (Allium cepa) है, जबकि अंग्रेजी में इसे ओनियन कहा जाता है। प्याज का शल्क कंद एक प्रकार का परिवर्तित भूमिगत तना है। यह ठंडी जलवायु की फसल है और हमारे देश में इसकी खेती खरीफ और रबी, दोनों मौसमों में की जाती है। इसके पत्ते हरे, सीधे, कोमल, पोले और नुकीले होते हैं। प्याज का चरपरापन या तीखापन एक उड़नशील पदार्थ एलाइल प्रोपाइल डाइ-सल्फाइड के कारण होता है। इसका पूरा भाग, यानी कंद और हरी पत्तियां, अलग-अलग रूपों में खाने के काम आता है।
कहां से आया प्याज
प्याज का उत्पत्ति स्थान उत्तरी-पश्चिमी भारत, अफगानिस्तान, मध्य एशिया और उष्णकटिबंधीय क्षेत्र को माना जाता है। यहीं से यह दुनिया के कई देशों में पहुंचा। भारत में प्याज की तीन प्रमुख किस्में पाई जाती हैं: सफेद, लाल और पीली।
आयुर्वेद की नजर में प्याज
आयुर्वेद के दृष्टिकोण से प्याज को कई औषधीय गुणों वाला माना गया है। मान्यता है कि यह सुपाच्य, शीतल, कब्ज नाशक और शक्ति देने वाला है। यह वायु, कफ और सूजन को शांत करने तथा कृमि नाशक के रूप में काम करने वाला माना जाता है।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार सफेद प्याज स्फूर्तिदायक और ताजगी देने वाला होता है। अनिद्रा, अपच, बवासीर और त्वचा संबंधी विकारों में इसे उपयोगी बताया गया है। लाल प्याज भूख बढ़ाने वाला और नींद न आने की समस्या में लाभकारी माना जाता है। यह कीटाणुनाशक होने के कारण दांतों, मसूड़ों और पेट के जीवाणुओं पर भी असर डालता है। महिलाओं के सौंदर्य और सुडौल शरीर के लिए भी इसे गुणकारी बताया गया है।
पोषक तत्वों का भंडार
प्याज के आहार मूल्य का रासायनिक विश्लेषण प्रजाति के अनुसार घटता-बढ़ता है। सफेद किस्म की तुलना में लाल और पीली किस्में औषधीय रूप से अधिक गुणकारी मानी जाती हैं। सामान्य तौर पर 100 ग्राम खाने योग्य कच्चे प्याज में निम्नलिखित पोषक तत्व पाए जाते हैं:
- पानी: 86.8 ग्राम
- प्रोटीन: 1.2 ग्राम
- वसा: 0.1 ग्राम
- खनिज पदार्थ: 0.4 ग्राम
- रेशा: 0.6 ग्राम
- कार्बोहाइड्रेट: 11 ग्राम
- कैलोरी: 49
- कैल्शियम: 180 मिलीग्राम
- फास्फोरस: 50 मिलीग्राम
- लोहा: 0.7 मिलीग्राम
- थायमिन: 0.08 मिलीग्राम
- राइबोफ्लेविन: 0.01 मिलीग्राम
- निकोटिनिक अम्ल: 0.4 मिलीग्राम
- विटामिन सी: 11 मिलीग्राम
घर के वैद्य का घरेलू उपयोग
औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण प्याज को घर के वैद्य की संज्ञा दी गई है। देशी नुस्खों के रूप में इसका उपयोग पीढ़ियों से होता आ रहा है। नीचे दिए गए उपाय पारंपरिक घरेलू मान्यताओं पर आधारित हैं।
पाचन और भूख के लिए: मसाला भरकर बनाया गया ताजा प्याज का अचार नियमित खाने से भोजन में रुचि बढ़ती है, भूख लगती है और पाचन शक्ति ठीक रहती है। थकान दूर होती है और नींद भी अच्छी आती है।
लू और गर्मी से बचाव: लू लगने पर प्याज का रस निकालकर पूरे बदन पर लगाने और मलने से राहत मिलने की मान्यता है। गर्मी के कारण सिर में दर्द हो तो कटी प्याज सूंघने और बारीक पीसकर तलवों में घिसने का नुस्खा भी प्रचलित है।
आंखों के लिए: माना जाता है कि प्याज के नियमित सेवन से आंखों की ज्योति बढ़ती है। दुखती आंखों में प्याज का रस डालने जैसे नुस्खे भी चलन में हैं।
नींद के लिए: प्याज का कचूमर दही में मिलाकर रात को खाने से अच्छी नींद आने की बात कही जाती है।
गला, दांत और स्मरण शक्ति: कच्ची हरी प्याज खाने से गला साफ रहता है और दांत मजबूत होते हैं। साथ ही स्मरण शक्ति बढ़ने तथा कमजोर स्नायु मजबूत होने की मान्यता है।
त्वचा संबंधी उपयोग: प्याज का रस दाद और खुजली पर लगाने, फटे पैरों व बिवाइयों पर पीसी हुई प्याज लगाने तथा बिच्छू के डंक वाले स्थान पर रस में नौसादर मिलाकर लगाने के नुस्खे प्रचलित हैं। चेहरे और शरीर के काले दागों पर नियमित रस लगाने से कालापन दूर होने की बात भी कही जाती है।
बाल और सिर की त्वचा: सिर के गंजेपन में प्याज को महीन पीसकर लेप करने और रस में शहद मिलाकर गंजे स्थान पर नियमित लगाने से नए बाल उगने तथा असमय सफेद हुए बाल काले होने का दावा पारंपरिक नुस्खों में मिलता है।
बच्चों के लिए: बढ़ते बच्चों को रोज प्याज और गुड़ खिलाने से लंबाई तेजी से बढ़ने की धारणा है।
अन्य प्रचलित नुस्खे: नाक से खून गिरने पर प्याज का रस सूंघने या नाक में कुछ बूंदें डालने, उल्टी और दस्त में प्याज का रस पिलाने, कान के दर्द में रस डालने तथा पीलिया में सफेद प्याज, गुड़ और हल्दी की थोड़ी मात्रा के सेवन जैसे नुस्खे भी घरों में चलते हैं। खूनी बवासीर में मिश्री मिलाकर प्याज का रस लेने, खून की कमी में कच्चा प्याज खाने और हृदय के मरीजों को रोज भोजन में एक प्याज खाने की सलाह भी परंपरा में मिलती है।
कैसे करें प्याज का सेवन
औषधीय रूप से इस्तेमाल के लिए प्याज का रस निकालकर जरूरत के अनुसार सेवन किया जाता है। इसके अलावा इसे सीधे कच्चे रूप में भी खाया जा सकता है। सुबह-शाम के भोजन के साथ सलाद के रूप में इसका सेवन किया जा सकता है। औषधीय दृष्टिकोण से सफेद प्याज का सेवन अधिक करना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
प्याज का औषधीय इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं। इन्हें अनदेखा करने पर लाभ की जगह नुकसान भी हो सकता है।
- प्याज में पोषक तत्व अधिक होने के कारण सभी लोग इसे पचा नहीं पाते या उन्हें गैस की समस्या होने लगती है। ऐसे लोगों को कम मात्रा में सेवन करना चाहिए और अधिक से अधिक श्रम करना चाहिए।
- शारीरिक क्षमता के अनुसार ही प्याज का सेवन करें, अन्यथा शरीर में फोड़े-फुंसी होने की संभावना बढ़ सकती है।
- प्याज और दूध का सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए। दोनों के बीच कम से कम तीन से चार घंटे का अंतर जरूर होना चाहिए।
- आंखें दुख रही हों तो प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए, अन्यथा आंखों का दर्द और बढ़ सकता है।
- प्याज को काटने के बाद तुरंत सेवन करना चाहिए, वरना इसमें पाया जाने वाला उड़नशील पदार्थ नष्ट हो जाता है।
निष्कर्ष :
स्वाद, सेहत और कमाई, तीनों के लिहाज से प्याज भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था की अहम कड़ी है। रसोई में इसकी बादशाहत जितनी पुरानी है, खेतों में इसकी अहमियत उतनी ही बड़ी। जरूरत इस बात की है कि हम इसके गुणों को समझें और सही मात्रा व सही तरीके से इसका इस्तेमाल करें।
नोट : लेख में बताए गए घरेलू नुस्खे पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में चिकित्सक की सलाह जरूर लें। खेती की सही और वैज्ञानिक जानकारी के लिए पढ़ें: https://khetikibaate.com

